Youth Section


Yuva Kranti Varsh 
Yuva Kranti Varsh

यौवन की जिम्मेदारी

Large red circle युवावस्था जीवन का वह अंश हैजिसमें उत्साहस्फूर्तिउमंगउन्माद और क्रिया शीलता का तरंगें प्रचण्ड वेग के साथ बहती रहती है। अब तक जितने भी महत्वपूर्ण कार्य हुए हैंउसकी नींव यौवन की सुदृढ़ भूमि पर ही रखी गई हैं। बालकों और वृद्धों की शक्ति सीमित होने  के कारण उनसे किसी महान् कार्य की आशा बहुत ही स्वल्प मात्रा में की जा सकती है।
Large blue circle वृक्ष बसन्त ऋतु में पल्लवपुष्प और फलों से सुशोभित होते हैं। मनुष्य अपने यौवन काल में पूर्ण आया के साथ विकसित होता है। वृक्षों को कई बसन्त बार-बार प्राप्त होते हैंपर मनुष्य का यौवन बसन्त केवल एक बार ही आता हैइसके बाद असमर्थता और निराशा से भरी वृद्धावस्था तत्पश्चात् मृत्यु! जिसने यौवन का सदुपयोग नहीं कर पायाउसको हाथ मल-मल कर पक्ष ताना ही शेष रह जाता है।
Large red circle यौवन सब से बड़ी जिम्मेदारी है। यह ईश्वर की दी हुई सब से बड़ी अमानत हैजिसका समय रहते उसमें से उत्तम उपयोग करना चाहिए। किसी भी देश और जाति का भाग्य उसके नव-युवकों के हाथ रहता है। जिस समाज के युवक जागरुक परायण और देश भक्त हैंवहीं सामूहिक उन्न्ति हो सकती है। जहाँ के युवकों आलस्यअकर्मण्यतास्वार्थ परता और दुर्गुणों की भरमार होगीवह देश जाति कदापि उन्नति के पथ पर अवसर नहीं हो सकती।
Large blue circle एक समय जो संसार का मुकुट मणि थावह भारत आज सब प्रकार दीन-हीनपतित-पराधीन बना हुआ है। पद-दलित भारत माता अपने सपूतों की ओर सजल नेत्रों से देख रही है और चाहती हैकि उसके ननिहाल अपने तुच्छ स्वार्थों को छोड़कर आगे बढ़ें और अज्ञानदरिद्रदुष्ट दुराचार रूपी असुरों को इस पुण्य भूमि से मार भगावें। भारतीय नवयुवक यौवन की जिम्मेदारी को अनुभव करते हुए तुच्छ स्वार्थों को छोड़कर देश सेवा के पथ पर अग्रसर हो इसकी आज ही सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Rose अखण्ड ज्योति जून 1943 पृष्ठ 30






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